एक शराबी महादेव का जबरदस्त भक्त था। वह रोज शाम में शराब पीता और फिर नशे में झूमता हुआ घर को लौटता। उसके घर के रास्ते में एक शिव मंदिर पड़ता था। वह रोज वहां रात बारह बजे पहुंचता था। मंदिर के बाहर चप्पल उतार कर अंदर जाता, जोर से घंटा बजाता। इसके बाद वहां पड़ी बाल्टी में पास के कुएं से पानी निकलता और शिवलिंग पर श्रद्धा से जलाभिषेक करता। फिर वह जेब से दो फूल और एक लड्डू निकाल कर शिवलिंग पर चढ़ाकर बाहर निकल जाता था। सालों से उसका यह नियम चल रहा था। कभी वह नागा नहीं करता और न कभी लेट होता।
एक दिन महादेव ने सोचा कि इस भक्त की परीक्षा ली जाए। यह नशे में धुत्त रहता है। इसे पता भी है यह किसकी पूजा कर रहा है। यह सोचकर महादेव ने एक दिन अपनी जगह गणेश जी को बिठा दिया।
उस दिन भी रोज की तरह नशे में झूमता शराबी आया और मंदिर का घंटा बजाने लगा। घंटा बजाने से पहले वह एक क्षण के लिए रुका। उसने एक नजर सामने देखा और फिर घंटा बजाने लगा। फिर वही सारी क्रिया दुहराई जो वह रोज करता था। मंदिर से निकलने से पहले उसने गणेश जी की ओर देखा और बोला, छोटू पप्पा आएं तो बता देना कि अंकल आए थे। इतना कहकर वह निकल गया।
इस कहानी की सीख यह है कि सच्चा भक्त चाहे जिस भी हालत में हो, अपने इष्टदेव को पहचानने में कभी भूल नहीं कर सकता है।