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Thursday, 5 October 2023

इस बार साहित्य का नोबेल पुरस्कार नॉर्वेजियन लेखक जॉन फॉसे को दिया गया


 साल 2023 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार नॉर्वेजियन लेखक जॉन फॉसे को दिया गया है। यह पुरस्कार उनके अभिनव नाटकों और गद्य के लिए दिया गया है जो अनकही भावनाओं को आवाज देते हैं। 

जॉन फॉसे की लेखनी में भावनाओं का जिक्र 
इस वर्ष के साहित्य के नोबेल पुरस्कार विजेता जॉन फॉसे ने उपन्यासों को एक ऐसी शैली में लिखा है जिसे 'फॉसे मिनिमलिज्म' के नाम से जाना जाता है। इसे उनके दूसरे उपन्यास 'स्टेंग्ड गिटार' (1985) में देखा जा सकता है। फासे अपनी लेखनी में उन कष्टप्रद भावनाओं को शब्दों में जिक्र करते हैं, जिसे सामान्य तौर पर लिखना मुश्किल होता है। 

उनका पहला उपन्यास, राउड्ट, स्वार्ट (रेड, ब्लैक) 1983 में प्रकाशित हुआ था, हालांकि वह 1981 में एक स्टूडेंट न्यूजपेपर में प्रकाशित लघु कहानी हान (हे) को अपनी साहित्यिक शुरुआत मानते हैं. एक लेखक के रूप में उनकी सफलता 1989 के उपन्यास नॉस्टेट (बोटहाउस) से मिली.

स्टेंग्ड गिटार में उन्होंने लिखा कि एक नौजवान मां कूड़ा-कचरा नीचे फेंकने के लिए अपने फ्लैट से बाहर निकलती है, लेकिन खुद को बाहर बंद कर लेती है, जबकि उसका बच्चा अभी भी अंदर है। उसे जाकर मदद मांगनी है, लेकिन वह ऐसा करने में असमर्थ है क्योंकि वह अपने बच्चे को छोड़ नहीं सकती। जबकि वह खुद को, काफ्केस्क शब्दों में, 'कानून के सामने' पाती है। अंतर स्पष्ट है: फॉसे रोजमर्रा की ऐसी स्थितियों को प्रस्तुत करता है जिन्हें हमारे अपने जीवन से तुरंत पहचाना जा सकता है।


जॉन फॉसे की टार्जेई वेसास के साथ समानता
जॉन फॉसे और नॉर्वेजियन नाइनोर्स्क साहित्य के भीष्म पितामह कहे जाने वाले टार्जेई वेसास के साथ बहुत कुछ समानता है। फॉसे आधुनिकतावादी कलात्मक तकनीकों के साथ भाषाई और भौगोलिक दोनों तरह के मजबूत स्थानीय संबंधों को जोड़ते हैं। उन्होंने अपने वॉल्वरवांडशाफ्टन में सैमुअल बेकेट, थॉमस बर्नहार्ड और जॉर्ज ट्राकल जैसे नाम शामिल किए हैं। वहीं, वे अपने पूर्ववर्तियों के नकारात्मक दृष्टिकोण को साझा करते हैं, उनकी विशेष ज्ञानवादी दृष्टि को दुनिया की शून्यवादी अवमानना के परिणाम के रूप में नहीं कहा जा सकता है।
साल 2022 में यह पुरस्कार फ्रांसीसी लेखिका एनी एनॉक्स को दिया गया था। एनी ने अपनी लेखनी के जरिए साहसिक क्लिनिकल एक्यूटी (clinical acuity) पर कई लेख लिखे हैं। एनी एनॉक्स ने फ्रेंच, इंग्लिश में कई उपन्यास, लेख, नाटक और फिल्में भी लिखी हैं। साल 2021 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार उपन्यासकार अब्दुलराजक गुरनाह को दिया गया था। उन्हें अपनी लेखनी के जरिए उपनिवेशवाद के प्रभावों, संस्कृतियों को लेकर लिखने के लिए यह पुरस्कार दिया गया था। 2019 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार आस्ट्रियाई मूल के लेखक पीटर हैंडका को दिया गया था। उन्हें यह पुरस्कार इनोवेटिव लेखन और भाषा में नवीनतम प्रयोगों के लिए दिया गया था। 
Compiled: Legend News

Thursday, 10 October 2019

Olga Tokarjuk को 2018, पीटर हैंडके को 2019 के लिए साहित्य का नोबेल

स्टॉकहोम/स्वीडन। नोबेल पुरस्कारों की सीरीज में गुरुवार को साहित्य के नोबेल पुरस्कार विजेताओं की घोषणा हो गई है। वर्ष 2018 के लिए पोलैंड की लेखिका Olga Tokarjuk को इस पुरस्कार से नवाजा जाएगा जबकि साल 2019 का पुरस्कार आस्ट्रियाई लेखक पीटर हैंडके को दिया जाएगा।
साल 2018 और 2019 के लिए साहित्य के क्षेत्र में नोबल पुरस्कार की घोषणा गुरुवार को की गई। पोलिश लेखिका Olga Tokarjuk को साल 2018 के लिए साहित्य नोबल पुरस्कार से नवाजा गया। पिछले साल विवादों के कारण इसे स्थगित किया गया था।
लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता ओल्गा टोकारजुक को मौजूदा पीढ़ी के व्यावसायिक रूप से सफल लेखकों में से एक के रूप में जाना जाता है। 2018 में, उन्हें उपन्यास फ्लाइट्स (जेनिफर क्रॉफ्ट द्वारा अनुवादित) के लिए बुकर प्राइज से नवाजा गया था। यह पुरस्कार जीतने वाली वह पोलैंड की पहली लेखिका हैं।
उन्होंने वारसॉ विश्वविद्यालय से मनोवैज्ञानिक के तौर पर प्रशिक्षण लिया है और छोटी गद्य रचनाओं के साथ कविताओं, कई उपन्यासों, साथ ही अन्य पुस्तकों का संग्रह प्रकाशित किया। ‘फ्लाइट्स’ ने 2008 में, पोलैंड का शीर्ष साहित्यिक पुरस्कार नाइकी अवार्ड भी जीता।
मीटू के चलते पिछले साल नहीं दिया गया था साहित्य का नोबेल
पिछले साल नोबेल संस्थान की एक पूर्व सदस्या के पति फ्रांसीसी फोटोग्राफर ज्यां क्लाउड अर्नाल्ट पर यौन शोषण के आरोप लगे थे। इसके बाद स्वीडन की अकादमी को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। इसी वजह से उसने 2018 के साहित्य के नोबेल पुरस्कार नहीं देने की घोषणा की थी।
1936 में भी नहीं दिए गए थे पुरस्कार
हालांकि ये पहला मौका नहीं था। इससे पहले 1936 में भी पुरस्कार नहीं दिए गए थे। उस साल का पुरस्कार एक साल बाद इयुगेन ओ’नील को दिया गया था।


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